प्रदेश के प्रमख क्रांतिकारी राजस्थान का 1857 Full Explain 2019


Monday, 14 October 2019



प्रदेश के प्रमख क्रांतिकारी राजस्थान का 1857  Full Explain 2019



अमरसिंह बाटिया - 


यह बीकानेर निवासी राजस्थान का 1857 की क्रांति में प्रथम शहीद था अत : इसे ' राजस्थान का मंगल पाण्डे ' सि कहते हैं । इसने झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई को आर्थिक सहायता दी , इन अत : इसे 1857 की क्रांति का भामाशाह ' कहते हैं ।

अर्जुन लाल सेठी - 


इनका जन्म 9 सितम्बर , 1880 को जयपुर में ब हुआ । यह राजस्थान के प्रथम क्रांतिकारी थे । इन्हें ' जयपुर में 2 जनजागृति का जनक ' कहते हैं । इन्होनें चौम के जिलाधीश पद का रि त्याग यह कहते हुए ' अर्जुन लाल नौकरी करेगा तो अंग्रेजों को स भारत से बाहर कौन निकालेगा ' कर दिया । 1907 ई० में इन्होनें । अजमेर में ' जैन शिक्षा सोसायटी ' की स्थापना की । जिसके तहत ' 1907 में ही जैन वर्धमान पाठशाला ' के नाम से जयपुर में विद्यालय नि खोला गया । इस विद्यालय में क्रांतिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता था । सेठी व मोतीचन्द को बिहार नीमज मठ के महंत की हत्या कि के आरोप में 1914 में बैलूर जेल में सात वर्ष की सजा हुई । यहाँ से र छूटने के बाद अजमेर दरगाह में बच्चों को अरबी / फारसी पढ़ाते हुए 23 के दिसम्बर , 1941 में उनका देहान्त हुआ । जिससे लोगों ने उन्हें मुसलमान में समझकर दफना दिया । इन्होने लार्ड हार्डिंग पर बम फेंकने की प्र योजना बनाई थी ।


जमनालाल बजाज - 


इनका जन्म 4 नवम्बर , 1889 को काशी का बास ( सीकर ) में हुआ । इन्हें ' गुलाम नं . 4 ( प्रथम भारत , म द्वितीय देशी रियासतों के राजा , तृतीय सीकर , चतुर्थ जमनालाल । बजाज ) / गाँधी का पाँचवा पुत्र / राजस्थान का भामाशाह ' आदि के नामों से जाना जाता है । इन्होने सीकर प्रजामण्डल की स्थापना की व जयपुर प्रजामण्डल का पुर्नगठन किया । इन्होने 1926 में जयपुर । में चरखा संघ की स्थापना की । प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों की । मदद करने के कारण इन्हें ' राय बहादुर ' की उपाधि दी गई , जिसे स उन्होने असहयोग आन्दोलन के तहत वापस लौटा दिया । इनकी f पत्नी का नाम जानकी देवी बजाज था , जो पद्म विभूषण प्राप्त करने वाली राजस्थान की प्रथम महिला थी ।

 केसरी सिंह बारहठ


 - इनका जन्म 21 नवम्बर , 1872 को देवपुरा गाँव ( शाहपुरा - भीलवाड़ा ) में हुआ । इन्हें राजस्थान केसरी ' के नाम र से जाना जाता है । इनका पूरा परिवार देश के लिए शहीद हो गया । इन्हें जोधपुर के रामस्नेही महन्त प्यारेलाल की हत्या के आरोप में 20 वर्ष की : सजा हुई । इन्होनें दिल्ली जाते समय मेवाड़ के महाराणा फतेह सिंह को । 1903 में ' चेतावणी रा नूंगट्या ' नामक 13 सोरठे भेजे , जिन्हें पढ़कर फतेह सिंह का सोया हुआ स्वाभिमान जाग गया । जिससे वो दिल्ली गए । परन्तु दिल्ली दरबार में नहीं गये । इन्होनें 1910 ई० में गोपाल सिंह । खरवा के साथ मिलकर ' वीर भारत सभा ( गुप्तचर सैनिक संगठन ) ' की ! स्थापना की । 14 अगस्त , 1941 में इनका कोटा में निधन हो गया । ' भारत में एकमात्र ठाकुर केसरी सिंह बारहठ ऐसे व्यक्ति हैं , जिन्होंने भारत माता की दासता की श्रृंखलाओं को काटने के लिए अपने ' समस्त परिवार को स्वतंत्रता के युद्ध में झोंक दिया । ' यह कथन । रास बिहारी बोस ने कहा था ।


प्रदेश के प्रमख क्रांतिकारी राजस्थान का 1857


 जोरावर सिंह बारहठ


 - इनका जन्य उदयपुर में हुआ । यह केसरी का मंगल पाण्डे सिंहवारत का छोटा भाई तथा प्रताप सिह बारहठकाचाचा था । स्थक सहायता दी , इनके गुरु अमीरचन्द थे जिन्होनें इनको जयपुर की जैन वर्धमान है । पाठशाला में शिक्षा दी । 23 दिसम्बर , 1912 में इसने लॉर्ड हॉडिंग पर पाठशाला में शिक्षा दा129 - S80 को जयपुर में बम फेंका ( इसकी स्मति में आज भी शाहपुरा - भीलवाड़ा में प्रतिवर्ष इन्हें ' जयपुर में 23 दिसम्बर को शहीद दिवस मनाते हैं ) । नीमज हत्याकाण्ड में इनके जलाधीश पदका खिलाफवारण्ट निकला परन्त इनकी फरारी के तहत अमरदास बैरागी 7 तो अंग्रेजों को साधू के वेश में कोटा में निमोनिया रोग से मृत्यु हो गई ।

गोपाल सिंह खरवा


 - यह अजमेर के खरया के ठाकुर थे , इन्हें की । जिसके तहत ' राजस्थान में सशस्त्र क्रांति का जनक ' कहा जाता है । इन्होनें केसरी यपुर में विद्यालय सिंह बारहठ के साथ वीर भारत सभा ' की स्थापना की । प्रशिक्षण दिया

प्रताप सिंह बारहठ 

- इनका जन्म उदयपुर में हुआ । यह केसरी 5 महंत की हत्या सिंह बारहठ के पुत्र व जोरावर सिंह बारहठ के भतीजे थे । यह नजा हुई । यहाँ से राजस्थान के सबसे कम उम्र के क्रांतिकारी थे । इन्हें बनारस पड्यंत्र - सी पढ़ाते हुए 23 के तहत आसानाड़ा जोधपुर से गिरफ्तार कर बरेली जेल ( उत्तर प्रदेश ) ने उन्हें मुसलमान में रखा गया , जहाँ अंग्रेजों द्वारा छोड़ने का लालच देकर गुप्त सूचना वम फेंकने की प्राप्त करने की कोशिश की तो प्रताप सिंह ने कहा मेरी माँ रोती है तो उसे रोने दो जिससे सैंकड़ों माताओं को न रोना पड़े यदि मैंने दिल 889 को काशी का भेद खोल दिया तो यह मेरी वास्तविक मृत्यु होगी और मेरी । ( प्रथम भारत , माता पर अमिट कलंक लगेगा । ' जेल में यातनाएँ सहते हुए 27 मई , तुर्थ जमनालाल 1918 को इनकी मृत्यु हो गई । प्रताप सिंह की मृत्यु पर उसके पिता माशाह ' आदि केसरी सिंह बारहठ ने कहा कि ' भारत माता का एक और सपूत की स्थापना की उसकी मुक्ति के लिए बलिदान हो गया ।

 विजय सिंह पथिक 


- इनका मूल नाम भूपसिंह था , इनका जन्म में अंग्रेजों की 1888 में गुठावली गाँव ( बुलन्दशहर - उत्तर प्रदेश ) में हुआ । शचीन्द्र ध दी गई , जिसे सान्याल के सम्पर्क में आने पर इन्होने क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग 7 दिया । इनकी लिया । सशस्त्र क्रांति के तहत ये गिरफ्तार हो गये और टॉडगढ़ जेल षण प्राप्त करने ( अजमेर ) से फरार होकर बिजौलिया व बेंगू किसान आन्दोलन का इन्होनें नेतृत्व किया , अत : इन्हें ' भारत में किसान आन्दोलन का 872 को देवपुरा जनक ' कहते हैं । इन्होनें ' वीर भारत समाज ' की स्थापना की तथा केसरी के नाम राजस्थान केसरी , नवीन राजस्थान / तरूण राजस्थान ( राजस्थान द हो गया । इन्हें सेवा संघ ने राजनैतिक जागरण फैलाने हेतु अजमेर से नवीन राजस्थान ' प में 20 वर्ष की नामक साप्ताहिक प्रकाशन प्रारंभ किया जिसके प्रकाशक विजय फतेह सिंह को सिंह पथिक थे । ) आदि अखबारों का संपादन किया । 28 मई , 1954 ने , जिन्हें पढ़कर को इनकी मृत्यु हो गई । से वो दिली गए

हीरालाल शास्त्री 


- इनका जन्म 24 नवम्बर , 1899 को जोबनेर में गोपाल सिंह ( जयपुर ) में हुआ । इनकी पुत्री शांताबाई के नाम पर उनकी पली कसंगठन ) ' की श्रीमती रतना शास्त्री द्वारा वनस्थली - निवाई ( टॉक ) में ' जीवन नधन हो गया । कुटीर ' नामक संस्था खोली गई , जिसे वर्तमान में वनस्थली विद्यापीठ क्त हैं , जिन्होंने कहते हैं । शास्त्री जी ने गीत ' प्रलय प्रतीक्षा नमो नमः व आत्मकथा के लिए अपने ' प्रत्यक्ष जीवन शास्त्र ' की रचना की । यह राजस्थान के प्रथम मनोनीत । ' यह कथन मुख्यमंत्री थे , जिनको मुख्यमंत्री की शपथ - राजप्रमुख मानसिंह द्वितीय ( जयपुर ) ने दिलाई । 




 भोगीलाल पाण्या


 - इनका जन्म 13 नवम्बर , 1904 में डूंगरपुर के ना । इन्हान आजादी सीमलवान गांव में हुआ । इन्हें ' बागाडका गांधी ' कहा जाता है । इन्होंने स्तकालखा । जिससे वागड़ सेवा मन्दिर , हरिजन सेवा समिति , भील सेवा संघ का स्थापना नई , प्रिया को जेल की । 31 मार्च , 1981 को जयपुर में इनकी मृत्यु हो गई । इनकी पला का 1946 को उन पर नाम ' मणि बहन पंड्या ' था जिसे ' वागढ़या ' के नाम से पुकारत हो ।

मोतीलाल तेजावत 


- इनका जन्म 1896 को कोल्यारी गाँव ( उदयपुर ) में हुआ । इन भील जनजाति के बाहुल्य क्षेत्र में 1898 को हाथल ' आदिवासियों का मसीहा / बावजी के नाम से जाना जाता है । इन्होने गाँधी / गाँधीवादी वनवासी संघ की स्थापना की तथा भीलों में राजनीतिक जाप्रति पैदा नषेध हेतु आमरण करने हेतु एकी / भोमट आन्दोलनको चित्तौडगढ़ से शुरु किया अत : स्थापना की । यह हम कह सकते हैं कि 1921 - 22 में मेवाड़ में प्रारंभ हुए भील व्यक्ष थे । इनका 6 आंदोलन के नेता मोतीलाल तेजावत थे । नीमा हत्याकाण्ड का संबंध एकी आंदोलन से है । 14 जनवरी , 1969 को इनकी मृत्यु हो गई । डीडवाना - नागौर ) मोतीलाल तेजावत द्वारा तैयार ' मेवाड़ पुकार ' एक मांग पत्र था , जो न में भूख हड़ताल महाराणा मेवाड़ को प्रस्तुत किया गया ।

ऋषिदत्त मेहता 


- इनका जन्म बूंदी में हुआ , इनका पूरा परिवार 1899 को जोधपुर आजादी के आंदोलन में जेल गया । 1920 के दशक में राजनीतिक गाही के विरूद्ध जागरण के उद्देश्य से ऋषिदत्त मेहता ( 1923 ) ने व्यावर से यक / शेर - ए - ' राजस्थान ' अखबार का प्रकाशन किया । नाम से जाना जाता

 मोहनलाल सुखाड़िया


 - इनका जन्म 31 जुलाई , 1916 को बत मुख्यमंत्री थे । नाथद्वारा ( राजसमन्द ) में हुआ । इन्हें ' आधुनिक राजस्थान का की । इन्होने 1932 निर्माता ' कहते हैं । इन्होने सर्वाधिक समय लगभग 17 वर्ष तक प्रथम राजनैतिक राजस्थान के मुख्यमंत्री पद पर कार्य किया । " अखण्ड भारत

 बावा नसिंह दास 


- राजस्थान के तीन भामाशाहों ( दामोदर दास लकाओं के लिए राठी - व्यावर , सेठ घीसूलाल जाजोड़िया - ब्यावर , सेठ नृसिंह दास व्यास ने स्थापित अग्रवाल - नागौर ) में से एक है । जिन्होनें तन - मन - धन सारा गाँधीजी । इनके नाम पर को सौंपकर साधु बन गये । या गया ।

 दामोदर लाल व्यास


 - इनका जन्म मालपुरा कस्ये ( टोंक ) में का थाना सीकर हुआ । राजस्थान के एकीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण स्थापना की तथा ' दामोदर लाल व्यास ' को ' राजस्थान का लौह पुरुष ' कहा गया है । किया ।

गोविंद गिरि


 - इनका जन्म बाँसिया गाँव ( डूंगरपुर ) में बंजारे नक अखबारों के परिवार में हुआ । मेवाड़ , बागड़ और आसपास के क्षेत्रों के भीलों में चौधरी था । सामाजिक सुधार के लिए गोविंद गिरि ने ' लसाड़िया आंदोलन ' का सीकर में हुआ । सूत्रपात कर जनजाति वर्ग के उत्थान हेतु 1883 ई . में सम्पसभा की जरी के बड़े भाई स्थापना की । इस सम्पसभा का 1913 ई० का सम्मेलन मानगढ़ की - नवज्योति का पहाड़ी ( राष्ट्रीय स्मारक मानगढ़ , बांसवाड़ा जिले में है । ) पर हुआ , जहाँ अंग्रेजों ने उस सभा पर गोलियां चलाई । राजस्थान के मानगढ़ बर , 1897 को ( बांसवाड़ा ) को वागड़ का जलियावाला बाग हत्याकाण्ड ' कहा ल के संस्थापक जाता है , तो सम्य सभा का प्रथम अधिवेशन - 1903 में हुआ । गोविंद त्साह बढ़ाते थे । गिरि ने अपना अंतिम समय गुजरात के कमबोई नामक स्थान पर तो अजमेर में बिताया । गोविंद गुरु का मुख्य शिष्य पूंजा धीरजी था । भगत आंदोलन स्तक की रचना का संबंध भील व गरासिया जनजाति से संबंधित है । इन्हीं के नाम पर

चुन्नीलाल शर्मा 


- डाबड़ा किसान आंदोलन डीड़वाना ( नागौर ) लाल आदिम में 13 मार्च , 1947 को शहीद हुए । पत्नी का नाम कालीबाई - यह वीरबाला रास्तापाल गांव ( डूंगरपुर ) की थी , जिसे 19 जून , 1947 को अपने अध्यापक सँगाबाई को मुक्त कराने के [




 हरिभाऊ उपाध्याय 


- हरिभाऊ उपाध्याय का जन्म 1892 ई० में क्षेत्र के नेत भौरासा गाँव ( ग्वालियर - मध्य प्रदेश ) में हुआ । राजस्थान के राजनीतिक - स्वतंत्रता से जागरण में अग्रणी रहे त्याग भूमि ' नामक समाचार पत्र के सम्पादक तो लोकप्रिय ' हरिभाऊ उपाध्याय ' थे , तो उन्होंने महिला शिक्षा सदन - हटुण्डी ( मारवाड़ ) ( अजमेर ) की स्थापना की । स्वतंत्रता सेनानी हरिभाऊ उपाध्याय - बाल्टस्कृत स्वतंत्रता के बाद 1952 में अजमेर मेरवाड़ा राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री - गवर्नर जना बने । दुरदावल , युगधर्म एवं बापू के आश्रम आदि हरिभाऊ उपाध्याय के दरबार व की प्रमुख रचनाएँ है । हरिभाऊ उपाध्याय ने राजस्थान का सी . आर . ' राजस्थान दास - मुकुट बिहारी लाल भार्गव को कहा था ।

ये भी जानें : 

  1. राजस्थान सेवा संघ के संस्थापक - विजय सिंह पथिक , रामनारायण कारण साग चौधरी एवं हरिभाई किंकर थे , जिन्होंने इसकी स्थापना वर्धा ( महाराष्ट्र ) कुछ समय में 1919 में की , परन्तु राजस्थान में मुख्यालय अजमेर को बनाया । नेहरू की 
  2. राजस्थान की स्वतंत्रता आंदोलनकारी महिलाओं सावित्री देवी का सातवा भाटी का संबंध जोधपुर से , भगवती देवी का उदयपुर से , लक्ष्मी - स्वामी केस देवी आचार्य का बीकानेर से तथा कुमारी कुसुम गुप्ता का कोटा कार्य ' लिस से संबंध था , तो राजस्थान के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गिरफ्तार - 25 अप्रेल , होने वाली राजस्थान की प्रथम महिला अंजना देवी चौधरी थी । 
  3. राजपूताना मध्य भारत सभा का प्रथम अधिवेशन सन् 1919 को 26 जनवरी दिल्ली में हुआ था । -
  4.  स्वयं सेवी संस्था ' तरूण भारत संघ ' के संस्थापक राजेन्द्र सिंह - स्वतंत्रता से हैं , तो आचार्य तुलसी का जन्म स्थल लाडनूं ( नागौर ) है । और अलव - 
  5. करौली में 1927 ई . को कुंवर मदन सिंह के नेतृत्व में किसानों ने आंदोलन किया , तो रमा देवी पाण्डे ने अजमेर सत्याग्रह आंदोलन - ' कांगड क में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
  6.  - सर्व सेवा संघ सर्वोदय के संस्थापक सिद्धराज बढडा थे , मारवाड़ हुआ । मारवाड़ से हितकारिणी सभा की स्थापना चांदमल सुराणा के द्वारा की गई 6 मारवाड़क थी , राजस्थान में नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना धौलपुर में - 1934 में हुई , अजमेर - मेरवाड़ा से संविधान सभा के सदस्य ज राजपूताना मुकुट विहारी भार्गव है ।
  7. भारत छोड़ो आंदोलन के समय राजस्थान में सबसे पहले - नाथद्वारा प्र क्रांतिकारी घटना जोधपुर में हुई । निभाई थी । 
  8. स्वतंत्रता सेनानी रामकरण सिंह परोड़ा ने 1947 - 48 में जोधपुर - 17 जुलाई में जाट - राजपूत संघर्ष को शांत करने का प्रयास किया , किन्तु - राजस्थान में मनाया गया अपने प्राण गंवा दिए ।
  9.  लासोडिया और मावजी को संयुक्त रूप से भील भगत के रूप में - करौली में मनाया गया जाना जाता है ।
  10.  लाहौर कांग्रेस अधिवेशन - 1930 में भाग लेने के कारण भजल माथुर ने की जल - जोधपर दो लाल बिजारणिया को वन विभाग की नौकरी से हटा दिया गया था । 
  11. नरेश मण्डल को स्थायी आधार पर 1921 में स्थापित किया - मारवाड़ पा दिवस ' मन गया । 
  12.  दूदवा खारा आंदोलन के हनुमान सिंह बुडानिया बीकानेर हटा दिया रियासत की पुलिस सेवा में भर्ती थे , जिन्होंने 1942 के स्वतंत्रता टी . विजय आंदोलन की बागडोर संभाली । 




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